PMKusum

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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार

किसानों के लिए
सौर ऊर्जा से समृद्धि

प्रधानमंत्री कुसुम योजना (PM-KUSUM) 2026 के अंतर्गत बंजर भूमि पर सोलर पंप लगाएं, सिंचाई की चिंता खत्म करें और अतिरिक्त बिजली बेचकर लाखों कमाएं।

Solar Farmer

सब्सिडी

60% - 90%

60%

सरकारी सब्सिडी (केंद्र + राज्य)

30%

बैंक लोन सुविधा उपलब्ध

10%

किसान का अंशदान (Investment)

Agriculture and Solar

योजना का परिचय

प्रधानमंत्री कुसुम योजना
आखिर क्या है?

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) भारत सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई एक क्रांतिकारी योजना है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को डीजल और बिजली के कृषि पंपों पर निर्भरता से मुक्त करना है। इसके तहत किसानों को अपनी बंजर भूमि पर सोलर पंप और ग्रिड से जुड़े सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए भारी सब्सिडी दी जाती है।

"अन्नदाता अब ऊर्जादाता भी बनेगा" - इस मंत्र के साथ किसान न केवल मुफ्त सिंचाई कर सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर नियमित आय भी कमा सकते हैं।

राष्ट्रीय लक्ष्य

कुसुम योजना के मुख्य उद्देश्य

इस महाभियान को शुरू करने के पीछे सरकार के कई दूरगामी और पर्यावरण-अनुकूल लक्ष्य हैं।

हरित ऊर्जा को बढ़ावा

कृषि क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट को कम करना और प्रदूषणकारी डीजल पंपों को स्वच्छ सौर ऊर्जा से बदलना।

ऊर्जा सुरक्षा

सिंचाई के लिए बिजली ग्रिड पर किसानों की निर्भरता खत्म करना और दिन के समय निर्बाध बिजली सुनिश्चित करना।

किसानों की आय वृद्धि

बंजर ज़मीन का सदुपयोग करना और सौर पैनलों से अतिरिक्त बिजली बेचकर किसानों के लिए एक नया आय स्रोत बनाना।

डीजल आयात में कमी

खेती में इस्तेमाल होने वाले लाखों लीटर डीजल की बचत करना, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार की भी बचत होगी।

3 मुख्य भाग

योजना के प्रमुख घटक (Components)

पीएम कुसुम योजना को किसानों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार तीन मुख्य घटकों में विभाजित किया गया है।

A

ग्रिड से जुड़े सोलर पावर प्लांट

किसानों की बंजर या कृषि भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक के विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना। इससे उत्पन्न बिजली को DISCOMs द्वारा खरीदा जाएगा।

B

स्टैंड-अलोन सोलर पंप

डीजल कृषि पंपों के स्थान पर 7.5 एचपी (HP) तक के स्टैंड-अलोन (ऑफ-ग्रिड) सौर कृषि पंपों की स्थापना। यह उन क्षेत्रों के लिए है जहाँ ग्रिड की बिजली नहीं है।

C

ग्रिड पंपों का सौरीकरण

मौजूदा ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए सौरीकरण (Solarization)। किसान अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच सकते हैं।

योजना के बेजोड़ लाभ

अतिरिक्त आय का साधन

सौर पैनलों से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को राज्य की बिजली वितरण कंपनियों को बेचकर सालाना कमाई।

डीजल/बिजली खर्च में भारी कमी

महंगे डीजल और भारी बिजली बिलों से हमेशा के लिए छुटकारा। सिंचाई के लिए 24x7 मुफ्त बिजली।

बंजर भूमि का सही उपयोग

ऐसी जमीन जहाँ खेती संभव नहीं है, वहाँ सोलर प्लांट लगाकर उस भूमि को आय का स्रोत बनाएं।

पात्रता एवं आवश्यक दस्तावेज

कौन आवेदन कर सकता है?

  • भारत का कोई भी किसान
  • किसानों का समूह / सहकारी समितियां
  • पंचायतें और किसान उत्पादक संगठन (FPO)

जरूरी कागजात (दस्तावेज)

आधार कार्ड
भूमि के कागजात (खतौनी)
बैंक पासबुक
पासपोर्ट फोटो
मोबाइल नंबर
आय प्रमाण पत्र

वित्तीय ढांचा

कैसे काम करता है सब्सिडी का गणित?

योजना को किसानों के लिए बेहद सस्ता और सुलभ बनाने के लिए सरकार ने लागत को तीन हिस्सों में बांटा है। आपको अपनी जेब से केवल एक छोटा सा हिस्सा देना होता है।

  • 60% सरकारी अनुदान (केंद्र और राज्य सरकार द्वारा)
  • 30% बैंक ऋण (आसान किस्तों पर लोन सुविधा)
  • 10% किसान का अंशदान (केवल इतना ही निवेश करना है)

कुल लागत का विभाजन (100%)

60%
30%
10%
सब्सिडी (Subsidy) लोन (Loan) आपका खर्च (Your Cost)

* पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में सरकारी अनुदान (सब्सिडी) 80% तक हो सकता है, जहाँ किसान को सिर्फ 10% देना होता है और बैंक लोन 10% रह जाता है।

महत्वपूर्ण सूचना: फर्जी वेबसाइट्स से सावधान रहें!

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने नोटिस जारी किया है कि कई फर्जी वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप पीएम कुसुम योजना के नाम पर किसानों से पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) की मांग कर रहे हैं।

  • सरकारी वेबसाइटों के अंत में .gov.in या .in होता है। (.org, .com, .in.net आदि से बचें)
  • योजना के लिए आवेदन करने पर सरकार कोई भी "अग्रिम शुल्क" (Upfront Fee) नहीं मांगती है।
  • किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक करके पेमेंट न करें।

आवेदन प्रक्रिया

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

योजना का लाभ उठाने के लिए नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करें।

1

आधिकारिक वेबसाइट

अपने राज्य के विद्युत वितरण निगम (DISCOM) या MNRE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

2

पंजीकरण

पोर्टल पर 'Apply Now' पर क्लिक करें। अपना मोबाइल नंबर और आधार दर्ज करके रजिस्टर करें।

3

दस्तावेज अपलोड

जमीन के कागजात (खतौनी), बैंक पासबुक और अपनी फोटो स्कैन करके सही-सही अपलोड करें।

4

स्वीकृति एवं भुगतान

आवेदन स्वीकृत होने के बाद अपना 10% अंशदान जमा करें। उसके बाद एजेंसी आकर पंप लगा देगी।

राज्यवार कार्यान्वयन

योजना लागू करने वाले प्रमुख राज्य

कुसुम योजना देश के लगभग सभी राज्यों में लागू है। इनमें से कुछ प्रमुख राज्य जहाँ बहुत तेजी से काम हो रहा है:

राजस्थान
उत्तर प्रदेश
मध्य प्रदेश
हरियाणा
महाराष्ट्र
गुजरात
पंजाब
कर्नाटक
बिहार
छत्तीसगढ़
झारखंड
तमिलनाडु

* अपने राज्य के नोडल अधिकारी और आधिकारिक पोर्टल की जानकारी के लिए केंद्र सरकार की वेबसाइट विजिट करें।

सफलता की कहानियाँ

किसानों की जुबानी, कुसुम योजना की कहानी

Farmer

"पहले डीजल पंप चलाने में बहुत खर्चा आता था। कुसुम योजना से सोलर पंप लगने के बाद सिंचाई मुफ्त हो गई है। मेरी बंजर ज़मीन अब मेरे लिए सोना उगल रही है।"

राम सिंह

जयपुर, राजस्थान

Farmer

"मैं सरकार का धन्यवाद करना चाहता हूँ। मेरे पास 5 एकड़ ज़मीन थी जहाँ बिजली नहीं थी। आज मेरे खेत में 5 HP का सोलर पंप लगा है और फसल बहुत अच्छी हो रही है।"

सुरेश पाटिल

पुणे, महाराष्ट्र

Farmer

"सौरीकरण (Solarization) से ना सिर्फ बिजली का बिल जीरो हुआ है, बल्कि जो अतिरिक्त बिजली बनती है, वो ग्रिड में जाकर मुझे एक्स्ट्रा इनकम दे रही है।"

हरप्रीत सिंह

करनाल, हरियाणा

शंकाओं का समाधान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

योजना के तहत कितने एचपी (HP) तक का सोलर पंप मिल सकता है?

योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए 0.5 HP से लेकर 7.5 HP क्षमता तक के स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप स्थापित करने पर सब्सिडी मिलती है।

क्या मुझे आवेदन के समय कोई पैसा देना होगा?

पोर्टल पर पंजीकरण के समय कोई भारी शुल्क नहीं होता। लेकिन धोखाधड़ी से बचें। सरकार कभी भी अज्ञात खातों में पैसे जमा करने को नहीं कहती। केवल 10% अंशदान मंजूरी के बाद देना होता है।

बंजर ज़मीन पर कितने मेगावाट का प्लांट लगा सकते हैं?

किसान अपनी बंजर या कम उपजाऊ ज़मीन पर 500 किलोवाट (0.5 MW) से लेकर 2 मेगावाट (2 MW) क्षमता तक के ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट लगा सकते हैं।

अतिरिक्त बिजली कैसे बेची जाएगी?

ग्रिड से जुड़े सोलर प्लांट या पंप से जो अतिरिक्त बिजली बनेगी, उसे राज्य की बिजली वितरण कंपनियां (DISCOMs) पूर्व-निर्धारित टैरिफ दर पर खरीदेंगी।

आज ही आवेदन करें और खुशहाली लाएं!

केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। फर्जी वेबसाइट्स और बिचौलियों से सावधान रहें। आवेदन पूरी तरह पारदर्शी है।

आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं (MNRE)

राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर: 1800-180-3333